12 ज्योतिर्लिंग समेत शिव मंदिरों में आस्था का सैलाब, काशी विश्वनाथ में उमड़े श्रद्धालु; सुरक्षा चाक-चौबंद

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करीब 2,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। ड्रोन कैमरों से भी निगरानी रखी जा रही है। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।
देशभर में महाशिवरात्रि पर्व मनाया जा रहा है। मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर (महाकाल मंदिर) के पट मंगलवार रात 2 बजकर 30 मिनट पर खोल दिए गए। जिसके बाद सुबह 4 बजे मंगला आरती की गई। अगले 44 घंटे तक भक्त भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। वहीं झारखंड के देवघर में मौजूद ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ रहा है। काशी विश्वनाथ मंदिर 26 फरवरी को मंगला आरती के बाद सुबह 3.30 बजे से मंदिर दर्शनार्थियों के लिए खोल दिया गया।
12 ज्योतिर्लिंग समेत बड़े शिव मंदियों में उमड़े श्रद्धालु
महाशिवरात्रि पर चारों पहर की आरती के दौरान भी श्री काशी विश्वनाथ महादेव की झांकी दर्शन चलती है। गुजरात में प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव मंदिर भी सुबह 4 बजे से लगातार 42 घंटे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला है। इनके अलावा देश में बाकी राज्यों में मौजूद ज्योतिर्लिंगों और प्रसिद्ध शिव मंदिरों में भगवान शिव जी के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं जिसको लेकर खास इतजाम भी किए गए हैं।
महाशिवरात्रि को लेकर क्या मान्यता
महाशिवरात्रि को लेकर मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती का विवाह हुआ था, लेकिन शिव पुराण सहित किसी भी ग्रंथ में इस बात का कोई जिक्र ही नहीं है।शिव पुराण में लिखा है कि फाल्गुन महीने के शुक्ल पक्ष के चौदहवें दिन यानी चतुर्दशी तिथि पर पहली बार शिवलिंग प्रकट हुआ था। तब भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी ने शिवलिंग की पूजा की। इसी दिन को शिवरात्रि कहा गया।
शिव पुराण के 35वें अध्याय में लिखा है कि शिव विवाह अगहन महीने के कृष्ण पक्ष के दूसरे दिन हुआ था। ये तिथि इस साल 7 नवंबर को आएगी। शिवरात्रि पर शिव विवाह मनाने की परंपरा कब से शुरू हुई, इस बारे में लिखित जानकारी नहीं है। काशी और उज्जैन के विद्वानों का कहना है कि शिवलिंग के निचले हिस्से में पार्वती का भी स्थान होता है। शिवरात्रि पर महादेव की पूजा रात में होती है। पार्वती के बिना शिव पूजन अधूरा रहता है, इसलिए इस रात को शिव-शक्ति मिलन के पर्व के तौर पर मनाया जाने लगा।














